स्वर्णाकर्षण भैरव — धन और समृद्धि के दिव्य देवता की सम्पूर्ण साधना | Astro Raunak Pandeyy

॥ ॐ ॥
स्वर्णाकर्षण भैरव — धन और समृद्धि के
दिव्य देवता की सम्पूर्ण साधना
✦ अस्त्रो रौनक पाण्डेय गुरुजी ✦
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॥ प्रस्तावना ॥
जब धन की आवश्यकता हो, आय के स्रोत बंद हो जाएँ,
व्यापार ठप पड़ जाए — तब उपासना करें उन दिव्य देवता की
जिन्होंने स्वयं माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर पर
सोने की वर्षा की थी।
उनका नाम है — स्वर्णाकर्षण भैरव।
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॥ काल भैरव — कौन हैं ये देवता? ॥
भगवान शिव के क्रोध से उत्पन्न महाशक्ति का नाम है —
काल भैरव। इन्होंने ब्रह्मा जी का पाँचवाँ सिर काटा था।
प्रायश्चित स्वरूप शिव जी ने उन्हें काशी की
रक्षा का उत्तरदायित्व सौंपा।
"काशी में जिस भी व्यक्ति की मृत्यु होती है —
उसकी सद्गति की जिम्मेदारी भगवान काल भैरव की है।
इसीलिए उन्हें काशी का कोतवाल कहा जाता है।"
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॥ भैरव के विविध स्वरूप ॥
🔱 52 भैरव
52 शक्तिपीठों की रक्षा हेतु भगवान भैरव ने
52 अलग-अलग स्वरूप धारण किए।
जैसे माता कामाख्या पीठ पर उमंड भैरव जी हैं।
🔱 काल भैरव के तीन मूल स्वरूप
✦ बटुक भैरव — बाल स्वरूप।
✦ आनंद भैरव — भैरवी सहित व्यस्क स्वरूप।
✦ काल भैरव — पूर्ण स्वरूप।
🔱 अष्ट भैरव
रुद्र भैरव, क्रोध भैरव, चंड भैरव,
कपाली भैरव — इत्यादि।
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॥ स्वर्णाकर्षण भैरव — उत्पत्ति की कथा ॥
देवासुर संग्राम में असुरों के पास तो धन था,
किन्तु माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर के पास
धन समाप्त हो गया।
भगवान शिव ने कहा —
"मैं तो न्यूट्रल हूँ। उपाय बताता हूँ —
मेरा एक स्वरूप है काल भैरव का।
तुम उनकी उपासना करो।"
माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर ने
वर्षों तक साधना की।
भगवान काल भैरव प्रकट हुए और
सोने की वर्षा की।
तब से उनका यह स्वरूप स्वर्णाकर्षण भैरव
कहलाया।
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॥ स्वर्णाकर्षण भैरव साधना के लाभ ॥
✦ आय के नए स्रोत खुलते हैं।
✦ ठप पड़ा व्यापार पुनः प्रारम्भ होता है।
✦ नौकरी में प्रमोशन और तरक्की मिलती है।
✦ लोन और कर्ज की समस्या से मुक्ति।
✦ मनोकामना पूर्ण होती है।
✦ इनकम सोर्सेस निरन्तर बढ़ते हैं।
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॥ देवता को देने से बढ़कर मिलता है ॥
जैसे पेड़ को पानी दो — वो फल और
ऑक्सीजन देता है।
उसी प्रकार देवताओं को भोग-पूजन देने पर
वे कई गुना बढ़ाकर लौटाते हैं।
🔥 यज्ञ का नियम
यज्ञ में जो भी डाला जाए — बढ़कर मिलता है।
एक चम्मच घी से वायुमण्डल शुद्ध होता है।
यह वैज्ञानिकों द्वारा भी प्रमाणित है।
"यदि आपने देवता को ₹1000 चढ़ाए —
तो वे ₹10,000 का आशीर्वाद लौटाते हैं।
परन्तु यह निर्भर करता है आपकी
भावना और समर्पण पर।"
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॥ साधना के विशेष मुहूर्त ॥
✦ अमावस्या और पूर्णिमा — अत्यन्त शुभ।
✦ काल भैरव अष्टमी — विशेष महत्त्व।
✦ दिवाली और होली — सर्वश्रेष्ठ समय।
✦ नवरात्रि काल — उत्तम फलदायी।
इनमें से किसी भी तिथि पर लगातार तीन दिन
साधना करने से विशेष कृपा प्राप्त होती है।
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॥ साधना के मूल नियम ॥
⚠ साधना से पूर्व इन बातों का ध्यान रखें —
✦ किसी योग्य गुरु से दीक्षा अनिवार्य है।
✦ गुरु आपकी सुरक्षा की जिम्मेदारी लें।
✦ भगवान काल भैरव के प्रति पूर्ण समर्पण हो।
✦ गुरु मंत्र और इष्ट की कृपा होनी चाहिए।
✦ बिना विश्वास के कोई साधना फलीभूत नहीं होती।
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॥ स्वर्णाकर्षण भैरव साधना कौन कर सकता है? ॥
✦ व्यापारी जिनका व्यवसाय ठप हो।
✦ नौकरीपेशा जो प्रमोशन चाहते हों।
✦ जिनके ऊपर लोन या कर्ज का भार हो।
✦ जो नए आय के स्रोत बनाना चाहते हों।
✦ कोई भी गुरु दीक्षित गृहस्थ साधक।
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यह ज्ञान श्री रौनक पाण्डेय गुरुजी के
प्रवचन पर आधारित है।