Spiritual Journey / आध्यात्मिक यात्रा6 min read

तंत्र मार्ग — एक साधक की अनकही यात्रा

Written by Astro Raunak PandeyyMay 31, 2026
तंत्र मार्ग — एक साधक की अनकही यात्रा

तंत्र मार्ग — एक साधक की अनकही यात्रा

From Gayatri Mantra to Kaal Bhairav — How One Soul Found His Path Through Fire

By Guruji Raunak Pandeyy | Spiritual Journey · Tantra · Vedic Wisdom


"जब भूख लगी है तो आप अच्छा होटल ढूंढ के खाना खा लोगे। जब आपके अंदर साधना की भूख होगी — तो आप ऑटोमेटिकली अच्छा गुरु ढूंढ लोगे।" — Guruji Raunak Pandeyy


कुछ यात्राएं मंज़िल से नहीं, जलन से शुरू होती हैं। उस जलन से — जो अंदर से उठती है, जो किसी भी किताब में नहीं बुझती, जो रात को नींद नहीं आने देती, जो कहती है: "बस देख लो — अपनी आंखों से।" Guruji Raunak Pandeyy की कहानी ऐसी ही है। और हमारे नए पॉडकास्ट एपिसोड में उन्होंने इस यात्रा को — बिना लाग-लपेट के — खुलकर सुनाया।


बचपन का संस्कार, मन का सवाल

बचपन में पिताजी की असामयिक मृत्यु। आर्थिक संकट। और फिर भी — पूजा-पाठ, कथा, रुद्राभिषेक, विवाह संस्कार — सोलहों संस्कारों को घर से ही देखा और सीखा। Guruji बताते हैं कि उन्हें इंजीनियर बनना था — परिवार का दबाव था। लेकिन मन कहीं और था।

"तंत्र मार्ग मेरी चॉइस थी। किसी मजबूरी में नहीं चुना। ये रास्ता मैंने खुद चुना।"

और यही वो बात है जो उन्हें बाकी लोगों से अलग करती है। जब दुनिया कह रही थी "डॉक्टर बनो, इंजीनियर बनो" — वो संस्कृत और ज्योतिष की ओर मुड़ रहे थे। नानाजी से ज्योतिष सीखने लगे। और फिर एक दिन — गायत्री मंत्र की दीक्षा हुई।


गायत्री से जागा अंतर्ज्ञान

गायत्री मंत्र की दीक्षा — प्रॉपर गुरु से, सारे नियमों के साथ। यज्ञोपवीत, मानसिक जाप, सात्विक जीवन — सब कुछ पालन किया। और तीन-चार महीने बाद? कुछ अजीब होने लगा।

"जैसे Déjà vu होता है ना — वैसा होने लगा। एक मिनट बाद आप क्या बोलने वाले हो — फटाक से माइंड में आता था। और वो हो जाता था।"

15-16 साल की उम्र। अंकल-दोस्तों को बताते थे — कुछ हंसते थे, कुछ मुंह पर हां कहकर पीछे से। फिर एक किताब में पढ़ा — इसे बताना नहीं चाहिए। जब बताना बंद किया — तो होने लगी। जब लहसुन-प्याज खाया — बंद हो गई।

गायत्री का पहला पाठ: शक्ति आपके जीवन को देखती है, आपके व्यवहार को।

गायत्री साधना के मूल नियम — जैसा Guruji ने बताया:

  • वाचिक जाप नहीं — मानसिक जाप होता है

  • पूर्णतः सात्विक आहार — लहसुन, प्याज तक नहीं

  • ब्रह्मचर्य का पालन

  • यज्ञोपवीत धारण करना

  • किसी को सिद्धि नहीं बतानी — तभी प्रकट होती है


काल भैरव की ओर — एक स्वाभाविक रुझान

हनुमान जी, शिव जी, दुर्गा माता — एक-एक देवी-देवता की ओर मन जाता रहा। फिर एक दिन — भगवान काल भैरव। Guruji बताते हैं कि जैसा स्वभाव होता है, वैसा इष्ट पकड़ते हैं। वो थोड़े उग्र किस्म के थे — तो भैरव की ओर रुझान आया।

बिना गुरु के, केवल फोटो रखकर, मन लगाकर पूजा शुरू की। और फिर एक रात — स्वप्न में एक गुरु आए। मंत्र दिया। कहा: "जा, तेरी गुरु दीक्षा होगी।"

"जब मथुरा के गुरुजी से ऑनलाइन दीक्षा ली — और उन्होंने जो गुरु मंत्र दिया — वो सेम वही था जो स्वप्न में मिला था।"

इसे आप संयोग कहें? चमत्कार कहें? या कहें — जब साधना सच्ची हो, तो गुरु खुद चलकर आते हैं।


दीक्षा के बाद — दो एंटिटीज का सामना

दीक्षा के बाद साधना तेज हुई। और एक दिन — खुली आंखों से दो एंटिटीज दिखीं। एक बहुत लंबा, गहरे ग्रे रंग का — जिसका चेहरा दिख नहीं रहा था। दूसरा — कंकाल जैसा। दोनों हंस रहे थे।

वो बोले — "जो मंत्र का जाप कर रहा था, गलत उच्चारण था। हम इतने दिनों से तेरे नाम पर भोग ले रहे थे।" Guruji ने गुरु का आह्वान किया, हनुमान चालीसा पढ़ी — और वो चले गए।

गुरुदेव ने बाद में कहा — "यही चीज है। थोड़ी गलती थी, वो सुधारो — आगे बढ़ो।"

"इस क्षेत्र में आए हैं तो मौत को साथ लेकर ही चलते हैं। क्या ही हो जाएगा।"


तंत्र और ज्योतिष — एक दूसरे के पूरक

एक सवाल जो अक्सर पूछा जाता है — तंत्र और ज्योतिष में कौन ज्यादा शक्तिशाली है? Guruji का जवाब स्पष्ट है: दोनों एक दूसरे के पूरक हैं।

वैदिक ज्योतिष में ग्रहों के जो उपाय होते हैं — पूजा, कर्मकांड — वैसे ही तांत्रिक कर्मकांड भी ग्रहों के रेमेडी हो सकते हैं। कुछ देवी-देवताओं की साधना से कई ग्रह स्वतः संतुलित हो जाते हैं। यही वो जगह है जहाँ ज्योतिष और तंत्र मिलते हैं।


ओशो, कृष्ण और परम सत्य

Guruji की आध्यात्मिक यात्रा में ओशो का बड़ा स्थान है। दिलचस्प बात — ओशो तंत्र के खिलाफ थे, फिर भी Guruji उन्हें बहुत मानते हैं।

"ओशो ने ही बताया — परमात्मा का असली स्वरूप क्या है। उनके जो चेतना का स्तर था — आज के समय में वैसा होना असंभव है।"

कृष्ण के बारे में वो कहते हैं — "सब किया कृष्ण ने। युद्ध भी कर रहे हैं और होश में कह रहे हैं कि मैं कर्ता हूं ही नहीं।" कर्ता होते हुए भी अकर्ता का भाव — यही सबसे बड़ी साधना है।

और कठोपनिषद की नचिकेता-यमराज कथा सुनाते हुए वो एक गहरी बात कहते हैं — मोक्ष न ज्ञान से मिलता है, न भक्ति से, न तर्क से। केवल शरणागति से। पूरा समर्पण — ब्रह्मांड के प्रति।


नज़र और तंत्र बाधा — ऊर्जा का विज्ञान

नज़र — सुना तो सबने है। पर होती कैसे है?

Guruji इसे ऊर्जा के विज्ञान से समझाते हैं। हमारे तीन शरीर होते हैं — स्थूल (Physical), सूक्ष्म (Aura/Mind), और कारक (Karmic)। जब कोई व्यक्ति जलन या नकारात्मकता के साथ किसी के बारे में सोचता है — वो नकारात्मक ऊर्जा उसके सूक्ष्म शरीर को छूती है। लंबे समय तक यही चलता रहे तो — बंधन, स्तंभन।

"हॉस्पिटल जाएं या किसी नेगेटिव पर्सन के पास बैठें — घर आकर देखो, ओरा थोड़ा डाउन लगेगा। फिर मंदिर जाओ — फर्क आ जाएगा।"

यही ऊर्जा का खेल है। और यही हीलिंग का आधार भी।


सेवा या सर्विस? — Guruji की बेबाकी

Guruji की एक बात जो सबसे ज्यादा प्रभावित करती है — वो है उनकी ईमानदारी। वो साफ कहते हैं: "मैं लोगों का भला कर रहा हूं — और इसके पैसे लेता हूं।"

"जब भी मैं उस बच्चे को देखता हूं जो मेरी वजह से इस दुनिया में आया — तब लगता है, यही मेरा सुकून है। और इसी सुकून को मैंने प्रोफेशन बना लिया।"

स्पिरिचुअलिटी अलग चीज़ है — और पूजा-पाठ, तंत्र, हीलिंग — ये एक प्रोफेशन है। इसमें शर्म कैसी? जब डॉक्टर अपने ज्ञान के पैसे ले सकता है, तो साधक क्यों नहीं?


सनातन का असली अर्थ

पॉडकास्ट का सबसे गहरा हिस्सा। सनातन क्या है — धर्म? भाषा? कपड़े? देवी-देवता?

Guruji कहते हैं — देवता बदले, भाषा बदली, कपड़े बदले। तो सनातन क्या बचा?

"सनातन आपकी चेतना है। वो आत्मा जो अनादि काल से है और अनादि काल तक रहेगी। नैनं छिदन्ति शस्त्राणि — वो जो आपके भीतर है। वही सनातन है।"


अंत में...

यह पॉडकास्ट सिर्फ एक बातचीत नहीं था — यह एक दर्पण था। जिसमें Guruji ने अपनी यात्रा दिखाई — बचपन की गरीबी से लेकर तांत्रिक दीक्षा तक, स्वप्न के गुरु से लेकर खुली आंखों के अनुभव तक।

एक बात जो हर साधक को याद रखनी चाहिए — जो Guruji ने कही:

"कमी मेरे अंदर है — रामकृष्ण परमहंस को काली माता प्राप्त हुई तो वो सही थे। बस मेरे में कुछ कमी है।"

यही वो भाव है जो एक साधक को महान बनाता है। अहंकार नहीं — शरणागति।

॥ ॐ नमो नारायण ॥

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